दिल्ली पुलिस के ASI ने 6 दिनों में जीती कोरोना से जंग - Daily News Update

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Saturday, April 18, 2020

दिल्ली पुलिस के ASI ने 6 दिनों में जीती कोरोना से जंग

नई दिल्ली हौज खास सर्कल में तैनात ट्रैफिक पुलिस के जिस को कोरोना हुआ था, उन्होंने यह जंग महज 6 दिनों में जीत ली। अब वह पूरी तरह से ठीक होकर कालकाजी के पुलिस कॉलोनी में आ चुके हैं। इनका कहना है कि कोरोना होने पर भी डरें नहीं, हिम्मत और धैर्य से काम लें। जीत आपकी होगी। अगर वह भी डर जाते तो उनके इलाज में बड़ी मुश्किल हो जाती। लेकिन उन्होंने अपनी विल पावर को कमजोर नहीं पड़ने दिया। एएसआई ने एनबीटी से खास बातचीत में बताया कि सबसे पहले 30 मार्च को उन्हें हलका बुखार और बॉडी में दर्द हुआ था। उस वक्त वह ड्यूटी पर थे। उन्होंने सामान्य फ्लू समझते हुए पीसीएम ले ली थी। लेकिन अगले दिन फिर से उन्हें यही परेशानी हुई तो उन्होंने अपने इंचार्ज टीआई से कहा। टीआई ने उनसे एम्स में टेस्ट कराने के लिए कहा। अगले दिन यानी 1 अप्रैल को वह एम्स पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनका फीवर और बीपी चेक किया। इसके बाद उन्हें यह कहकर होम क्वारंटीन होने के लिए बोल दिया कि आपको कोरोना तो नहीं लग रहा है। लेकिन अभी कुछ दिनों तक घर पर ही रहो। उनकी परेशानी बढ़ती गई। फिर 4 अप्रैल को उन्होंने न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अपने कुछ टेस्ट कराए। वहां उन्हें कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी गई। 6 अप्रैल तक उनके गले में तेज दर्द होने लगा। लगातार 103-4 डिग्री तक तेज बुखार होता रहा, पूरे शरीर में अकड़न होती रही। 7 अप्रैल की सुबह वह सफदरजंग हॉस्पिटल पहुंच गए। वहां सुबह 11 बजे उनका कोरोना टेस्ट किया। उसकी रिपोर्ट उसी दिन शाम करीब 7 बजे आ गई। जिसमें उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया। उन्हें यहां भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया गया। 12 अप्रैल को उनका कोरोना टेस्ट हुआ। 13 अप्रैल की सुबह उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। फिर 15 अप्रैल को भी उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसे देखते हुए 17 अप्रैल की दोपहर को उन्हें कुछ दिनों के लिए घर पर ही आराम करने की बात कहते हुए छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि वहां भर्ती होने के तीन दिन बाद उनका बुखार खत्म हो गया था। जिस वॉर्ड में उन्हें रखा गया था। वहां ना तो एसी चलाया जाता था और ना पंखे की कोई व्यवस्था थी। शायद कोरोना मरीज को थोड़ा गर्म माहौल देने के चलते ऐसा किया जा रहा था। 13 अप्रैल से उनका ट्रीटमेंट बंद कर दिया गया था। इसके बाद से उन्हें ताकत की दवाइयां दी जा रही थीं। डॉक्टर आकर बताते थे कि डरो नहीं, हिम्मत रखो। देखना आप एकदम फिट होकर यहां से जाएंगे। घर आने पर कालकाजी थाने के एसएचओ और अन्य लोगों ने फूलों से उनका स्वागत किया।


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