रांची खुला आसमान ही छत था। जिंदगी किसी तरह सड़कों पर स्टेशन या शहर के किसी कोने में कट रही थी। लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। दो बच्चों को अपर बाजार में ट्रक ने कुचल दिया।from Jagran Hindi News - jharkhand:ranchi https://ift.tt/32AdKWn
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रांची खुला आसमान ही छत था। जिंदगी किसी तरह सड़कों पर स्टेशन या शहर के किसी कोने में कट रही थी। लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। दो बच्चों को अपर बाजार में ट्रक ने कुचल दिया।
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