खुशिया बांटने से बढ़ती है और दर्द बांटने के घटता है. राजधानी के दिव्यांग विद्यालयों, ओल्ड एज होम और अनाथालय में इसको देखा और महसूस किया जा सकता है. यहां आज की युवा पीढ़ी का एक बड़ा वर्ग अपने खास दिनों को इन बच्चों, बुजुर्गों के साथ बिता कर ना केवल अपनी खुशिया बांट रहा है बल्कि यहां रहने वालों की तन्हाई और अकेलेपन के दर्द को भी साझा कर रहा है.from Latest News झारखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2POsq2O

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